EVM क्या है, कैसे काम करता है और क्या इसे हैक किया जा सकता है

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) ने चुनावी प्रक्रिया में क्रांति ला दी है, लेकिन इसके साथ ही चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। EVM मशीनों ने पारंपरिक कागजी मतपत्रों का एक आधुनिक विकल्प तो दिया है लेकिन इसके साथ ही मतदान के दौरान गड़बड़ी के आरोपो को बड़े स्तर पर जन्म दिया है। अमूमन ये आरोप चुनाव में हारने वाली पार्टी के द्वारा लगाये जाते है, फिर चाहे वो कोई भी हो।

दुनिया भर में व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली ईवीएम भारत में विशेष रूप से प्रमुख हैं, क्योंकि भारत मे 16 लाख से अधिक EVM मशीनों का उपयोग किया जाता है चुनाव आयोग द्वारा विकसित और परीक्षण की गई, इन मशीनों ने मैन्युअल प्रक्रियाओं को कुशल और प्रौद्योगिकी-संचालित तंत्रों के साथ प्रतिस्थापित करते हुए, मतदान प्रक्रिया व अनुभवों को बदल दिया है।

EVM मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से वोट डालने की अनुमति देती है, जिससे भौतिक मतपत्रों की आवश्यकता खत्म हो जाती है। EVM के मतों की गिनती करने में और बैलेट पेपर के मतों की गिनती करने के मुकाबले कम समय लगता है। आज इस लेख में हम जानेगे की EVM क्या है, यह काम कैसे करता है, EVM को हैक किया जा सकता है या नही, यदि इसे हैक किया जा सकता है तो कैसे।

EVM क्या है ?

सिंपल शब्दो मे कहे तो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) एक आधुनिक तकनीक है जिसका उपयोग चुनावों में वोट डालने और गिनती के लिए किया जाता है। यह पारंपरिक कागजी मतपत्रों को रिप्लेस करते हुए वोटिंग करने की प्रक्रिया को सरल बनाता है। सरल शब्दों में, मतदाता अपने चुने हुए उम्मीदवार के बगल में मशीन पर एक बटन दबाते हैं, और ईवीएम इलेक्ट्रॉनिक रूप से उनका वोट रिकॉर्ड करता है। EVM वोटों का मिलान करने का एक त्वरित और सटीक तरीका प्रदान करता है, जिससे वोटिंग और वोटो की गिनती में तेजी आती है।

यदि तकनीकी शब्दो मे EVM को परिभाषित किया जाए तो यह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसे सुरक्षित चुनाव कराने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। इसमें दो प्राथमिक कॉम्पोनेन्ट होते हैं: कंट्रोल यूनिट और बैलट यूनिट। कंट्रोल यूनिट, सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के रूप में काम करती है, यह यूनिट ईवीएम की समग्र कार्यक्षमता को मैनेज करने का काम करती है।आप कितने भी बटन दबाए, वोट नही काउंट किये जायेंगे जबतक मतदान अधिकारियों द्वारा सक्रिय कंट्रोल यूनिट को ऑन नही किया जाता।

दूसरा बैलेटिंग यूनिट मतदाताओं के लिए इंटरफ़ेस है, जिसमें उम्मीदवार से संबंधित बटनों के साथ उम्मीदवारों की एक लिस्ट होती है। जब मतदाता अपने चुने हुए उम्मीदवार के बगल में बटन दबाते हैं, तो कंट्रोल यूनिट वोट काउंट कर लेती है।

पारदर्शिता को बढ़ाते हुए, आधुनिक EVM मशीनों में अक्सर वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) शामिल होता है। यह सिस्टम एक कागजी रसीद तैयार करता है, जिसमें आपके द्वारा वोट किये गए उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह छपा होता है, जिससे मतदाता अपनी पसंद को सत्यापित कर सकते हैं। इस प्रोसेस को आप कुछ एटीएम मशीन की तरह समझ सकते है।

EVM कैसे काम करता है

Elctronic voting Machine (EVM) ने चुनावी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है।EVM कैसे काम करता है, इसके अंदरूनी फंक्शन्स को यहां हमने चरणबद्ध तरीके से समझाया है-

1. सेटअप

चुनाव शुरू होने से पहले, एक प्रशिक्षित मतदान अधिकारी ईवीएम को इनिशियलाइज़ यानी शुरू करता है। वोटिंग के लिए यह सबसे जरूरी स्टेप है और यह मतदान अधिकारी भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि यही अधिकारी सुनिश्चित करता है कि मशीन शून्य वोटों से शुरू हो, और निष्पक्ष हो। जबतक यह अधिकारी मशीन ऑन नही करेगा तब तक वोट नही काउंट किये जाते।

2. वोट डालना

इसके बाद जब एक मतदाता मतदान केंद्र में मतदान के लिए आता है और अपने पसंदीदा उम्मीदवार के अनुरूप बटन दबाता हैं। टोनिस्के पश्चात मतपत्र इकाई, नियंत्रण इकाई में इलेक्ट्रॉनिक रूप से वोट दर्ज करके मतदाता की पसंद को रजिस्टर करने के लिए जिम्मेदार होती है। सिम्पली मतदाता द्वारा वोट करने पर मतपत्र इकाई कंट्रोल यूनिट में वोटो को रजिस्टर करती है। वोट करने के बाद आपका वोट कंट्रोल यूनिट में पंजीकृत रहता है।

3. कंट्रोल यूनिट और बैलेटिंग यूनिट इंटरेक्शन

कंट्रोल यूनिट ईवीएम के मस्तिष्क के रूप में काम करती है,यह संपूर्ण मतदान प्रक्रिया का प्रबंधन करती है। यह बैलेटिंग यूनिट के माध्यम से मतदाताओं द्वारा डाले गए वोटों को प्राप्त करता है और उसे स्टोर करता है। यह इंटरैक्शन प्रत्येक वोट की निर्बाध और सटीक रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करता है। दूसरी ओर, मतपत्र इकाई मतदाताओं को भौतिक रूप से अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट करने की अनुमति देती है।

4. वोटर-वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT)

आजकल के EVM में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) का उपयोग किया जाता है। यह एक पेपर रसीद प्रिंट करता है जिसमें चुने गए उम्मीदवार का सिंबल और नाम होता है। मतदाता इस प्रिंटेड रिकॉर्ड के माध्यम से अपने द्वारा चुने गए उम्मीदवार को सत्यापित कर सकते है।

5. रिजल्ट डिस्प्ले

मतदान खत्म होने के बाद, कंट्रोल यूनिट में दर्ज किये गये मतों का मिलान किया जाता है। फिर उसके पश्चात परिणाम प्रदर्शित किया जाता है, जिससे चुनाव के परिणाम का पता चलता है।

Note- कंट्रोल यूनिट पीठासीन अधिकारी के पास होती है जबकि मतपत्र यूनिट कम्पार्टमेंट में होती है। ऐसा इसलिए होता है कि वोटिंग बूथ पर किसी असमान्य स्थिति में वोटिंग को रोका जा सके। मान लीजिए बूथ पर यदि कोई हमला होता है तो पीठासीन अधिकारी अंदर से कंट्रोल यूनिट ऑफ करके वोटिंग वहीं रोक सकता है,इसके बाद कितने भी बटन दाबे जाए वोट कंट्रोल यूनिट में दर्ज नही होते।

क्या EVM हैक किया जा सकता है ?

लोकतंत्र एक ऐसा तंत्र है जहां जनता के मत के आधार पर नेता का चयन किया जाता है। देखा जाए तो मतदान लोकतंत्र का आधार है यदि मतदान में ही पारदर्शिता नही रहेगी तो यह लोकतंत्र के होने पर सवाल खड़े करता है। मतदान के लिए आवश्यक है सुरक्षित व पारदर्शी तरीका अपनाया जाए।

इसी क्रम में बैलट पेपर को EVM मशीनों से रिप्लेस किया गया। लेकिन समय समय पर EVM पर भी सवाल उठाते जाते रहे है। हारा हुआ पक्ष हमेशा यह आरोप लगाता है कि वोटिंग के दौरान EVM से छेड़खानी की गई है। ऐसे में यह सवाल कि क्या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को हैक किया जा सकता है, विभिन्न चुनावी प्रक्रियाओं में शुरू से ही जांच और चिंता का विषय रहा है।

एक लेखक के रूप में मेरी राय है कि कोई भी प्रणाली सुरक्षा जोखिमों से पूरी तरह प्रतिरक्षित नहीं है, लेकिन ईवीएम में कुछ मजबूत सुरक्षा उपाय जरूर मौजूद हैं। हालांकि यहां हम अपनी राय को प्राथमिकता न देते हुए इस बात का पता लगाएंगे की EVM को हैक किया जा सकता है या नही।

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EVM को कैसे हैक किया जा सकता है ?

निर्बाध,पारदर्शी व सुरक्षित तरीके से चुनावों करवाने के लिए जिम्मेदार चुनाव आयोग, मतदान प्रक्रिया की इंटीग्रिटी की सुरक्षा के लिए कड़े प्रोटोकॉल लागू करता है। EVM मशीनो को हैक किया जा सकता है या नही यह जानने से पहले हमें कुछ बेसिक बातों का ज्ञान होना आवश्यक है।

  • भारत मे 16 लाख से अधिक EVM मशीनों का उपयोग किया जाता है।

हैकिंग के लिए आवश्यक है-

  • मशीन का किसी भी दूसरे नेटवर्क से कनेक्शन हो।
  • EVM लाइव किसी सर्वर से जुड़ा हो
  • EVM में कोई रिसीवर लगा हो
  • EVM में कोई डिकोडर लगा हो

अब आते है अपने सवाल पर EVM हैक किया जा सकता है या नही ? EVM में उपरोक्त में से किसी तकनीक का उपयोग नही किया जाता, इसलिए EVM को हैक नही किया जा सकता।

यदि EVM किसी वायरलेस डिवाइस, ब्लूएटूथ, Wifi या किसी दूसरे नेटवर्क से कनेक्ट होता तो EVM के हैक होने की संभावनाएं बनती थी। यदि कुछ असामान्य घटना होती है तो एकसाथ 16 लाख EVM में ये डिकोडर, रिसीवर को प्लांट नही किया जा सकता।

Disclaimer- हम किसी तरह की हैकिंग का समर्थन नही करते, यह जानकरी सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य से साझा की गई है।

क्या EVM हैकिंग सम्भव है ?

13 वर्ष पहले अमरीका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस के जरिये EVM मशीन को हैक करने का दावा किया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक मोबाइल से एक सन्देश भेजकर मशीनों के नतीजों में महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते है। लेकिन इस तरह से हैकिंग करने के लिए मशीनों को चुनाव आयोग से हासिल करना पड़ेगा।

टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ धीरज सिन्हा का मानना है कि लाखो वोटिंग मशीनों को हैक करने के लिए काफी ज्यादा धन और अन्य संसाधनों की आवश्यकता है और ऐसा करने के लिए EVM मशीन बनाने वाले संस्था और चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया में शामिल होना होगा। वहीं इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के निर्माता, इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन आफ इंण्डिया लिमिटेड, हैदराबाद और भारत इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु ने कहा है की EVM पूर्णता सुरक्षित है और इसे हैक नही किया जा सकता।

EVM कितना विश्वसनीय है ?

चुनावी प्रक्रियाओं में तकनीक को शामिल करने पर हमेशा से सवाल उठते रहे है। तकनीकी विशेषज्ञ डंकन बुएल का मानना है कि हमे चुनावी प्रक्रियाओं में तकनीक का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। सॉफ्टवेयर ढंग से काम करे न करे, ये मुश्किल होता है वो भी तब जब मतों व मतदाताओं के बीच सम्बन्ध स्थापित न किया जा सके।

वहीं National Institute of Standards and Technology (NIST) सहित कई अध्ययन, मतदान उपकरणों पर विश्वसनीयता प्रकट करते है। इससे जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मतदान प्रणालियाँ आम तौर पर विश्वसनीय हैं, और डिजिटल रूप से डाले गए वोटों के कागजी रिकॉर्ड (VVPAT) जैसे उपायों के माध्यम से सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की विश्वसनीयता बहस का विषय है। जबकि समर्थकों का तर्क है कि ईवीएम दक्षता बढ़ाते हैं और मतदान प्रक्रिया में त्रुटियों को कम करते हैं, वहीं आलोचक संभावित कमजोरियों और मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हैं।

विदेशों में क्या है स्थिति? 

दुनिया के 33 देश किसी न किसी तरह से वोटिंग के लिए इलेक्ट्रिक वोटिंग प्रक्रिया को अपनाते है इसमी सबसे पुराना लोकतंत्र अमेरिका भी शामिल है। इस सूची में एस्तोनिया जैसे सबसे छोटे देश से लेकर भारत जैसा सबसे बड़ा लोकतंत्र शामिल है।

इलेक्ट्रिक वोटिंग अपनाने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राज़ील, कनाडा, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्राँस, जर्मनी, भारत, आयरलैंड, इटली, कज़ाखस्तान, लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्वे, फिलिपींस, रोमानिया, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, स्कॉटलैंड और वेनेज़ुएला शामिल हैं। अमेरिका शामिल है।

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