भारतीय इतिहास के 8 सबसे बड़े साम्राज्य

भारतीय इतिहास के 8 सबसे बड़े साम्राज्य: भारतीय इतिहास में ऐसे कई महान शासक और साम्राज्य हुए है, जिन्होंने भारत की डेमोग्राफी और संस्कृति को बदलने में अहम रोल निभाया। जैसे जैसे पुराने साम्राज्यो का पतन और नए साम्राज्यों का उदय हुआ, उसी के साथ नई संस्कृतियों का भी उदय हुआ। एक समय भारतीय साम्राज्य अपने समय का दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य था। आज हम आपको प्राचीन भारत के 8 सबसे बड़े साम्राज्य के बारे में बताने वाले है, जिन्होंने न सिर्फ भारत का भूगोल बदला, बल्कि संस्कृति को भी प्रभावित किया।

भारतीय इतिहास के 8 सबसे बड़े साम्राज्य की सूची

यहां हमने भारतीय इतिहास के 8 सबसे बड़े साम्राज्य के बारे में बताया है, जिन्होंने भारत के भूगोल, जम्बूद्वीप के विकास और सांस्कृतिक धरोहरों को प्रभावित किया।

मौर्य साम्राज्य (Maurya Empire)

मौर्य साम्राज्य भारत का सबसे बड़ा साम्रज्य है और दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक है। मौर्य साम्राज्य की स्थापना 322 ईसा पूर्व में सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने की थी। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने यवन राजकुमारी हेलेना से विवाह करके मौर्य साम्राज्य का विस्तार अफगानिस्तान तक किया। उसके बाद उनके पुत्र बिंदुसार ने इसका विस्तार दक्षिण भारत के सुदूर राज्यो तक किया। सम्राट अशोक के शासनकाल में ये साम्राज्य अपने चरम पर था। मौर्य साम्राज्य कुल विस्तार 52 लाख वर्ग किलोमीटर था।

मुग़ल साम्राज्य (Mughal Empire)

मुग़ल साम्राज्य भारतीय इतिहास के 8 सबसे बड़े साम्राज्य में से दूसरे स्थान पर है। मुगल साम्राज्य की स्थापना सन 1526 ईसवी में बाबर के द्वारा की गयी था। 19वी सदी के मध्य में इस साम्राज्य का सम्पूर्ण अंत हो गया। मुग़ल साम्राज्य का कुल क्षेत्रफल लगभग 40 लाख वर्ग किलोमीटर था, सन 1700 के आसपास मुग़ल साम्राज्य आने चरम पर था।

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चोल साम्राज्य (Chola Empire)

चोल साम्राज्य, एक प्रमुख मध्ययुगीन दक्षिण भारतीय राजवंश, 9वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान तेजी से फला-फूला। अपनी समुद्री शक्ति के लिए जाने जाने वाले चोलों ने विजय और कूटनीति के माध्यम से अपने क्षेत्र का विस्तार किया। उनका प्रभाव न केवल दक्षिण भारत में बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया तक भी फैला हुआ था। चोलों ने कला, संस्कृति और मंदिर वास्तुकला में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

गुप्त साम्राज्य (Gupta Empire)

गुप्त साम्राज्य एक शक्तिशाली प्राचीन भारतीय राजवंश था जिसने चौथी शताब्दी के प्रारंभ से छठी शताब्दी के अंत तक शासन किया था। उत्तरी और मध्य भारत में स्थित गुप्तों ने भारतीय संस्कृति, कला और विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे अपनी राजनीतिक स्थिरता, गणित में प्रगति और संस्कृत साहित्य के उत्कर्ष के लिए जाने जाते हैं।

दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate)

दिल्ली सल्तनत 13वीं से 16वीं शताब्दी तक उत्तर भारत में एक मध्ययुगीन मुस्लिम साम्राज्य था। घुरिद राजवंश द्वारा स्थापित, दिल्ली सल्तनत ने भारतीय उपमहाद्वीप में मुस्लिम शासन के सुदृढ़ीकरण को चिह्नित किया। दिल्ली सल्तनत के प्रमुख राजवंशों में गुलाम, खिलजी और तुगलक शामिल थे। सल्तनत के शासनकाल में सांस्कृतिक समामेलन, वास्तुशिल्प चमत्कार और भारत में फारसी और इस्लामी परंपराओं की शुरूआत देखी गई।

मराठा साम्राज्य (Maratha Empire)

मराठा साम्राज्य, वर्तमान महाराष्ट्र में दक्कन पठार से शुरू हुआ था, इसकी स्थापना 17 वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने की थी। मराठा साम्राज्य को मुगलों और अन्य क्षेत्रीय शासकों को चुनौती देते हुए भारत में दक्कन पठार में कई गयी थी। मराठों की सैन्य रणनीति और गुरिल्ला युद्ध ने उन्हें 18वीं शताब्दी तक एक दुर्जेय साम्राज्य स्थापित करने में सक्षम बनाया।

कुषाण साम्राज्य (Kushan Empire)

कुषाण साम्राज्य पहली से चौथी शताब्दी ईस्वी के दौरान मध्य एशिया, अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों को कवर करने वाला एक विशाल क्षेत्र था। कुषाणों के शासन के तहत, उत्तर पश्चिम भारत में आर्थिक और सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा मिला। कुषाण अपनी समृद्ध कलात्मक और मुद्राशास्त्रीय उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं, विशेष रूप से राजाओं और देवताओं की छवियों वाले सोने के सिक्कों के उत्पादन के लिए।

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हर्ष साम्राज्य (Harsh Empire)

हर्षवर्धन एक प्रमुख भारतीय शासक थे, जिन्होंने 606 से 647 ई. तक उत्तरी भारत में एक विशाल साम्राज्य पर शासन किया। उनके शासनकाल में समृद्धि और शांति का काल आया, जिससे उनका साम्राज्य संस्कृति और शिक्षा का केंद्र बन गया। हर्ष ने बौद्ध धर्म अपनाया और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया। हर्ष साम्राज्य की राजधानी कन्नौज में थी, और उन्होंने अपने लोगों के कल्याण और एकता के उद्देश्य से नीतियों का उदारतापूर्वक समर्थन किया।

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