Most powerful king of India: जाने भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजाओं के बारे में

भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजा: भारत की इस माटी में कई सम्राट हुए है, जिन्होंने भारत की भूगौलिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए। हजारों साल बाद आज भी कुछ सम्राटो के शासन का इन्फ्लुएंस भारत की राजनीति में देखने को मिलता है। भारत के महान सम्राट वे थे जो बुद्धिमत्ता और दया के साथ राज्य करते थे और वे सकारात्मक परिवर्तन की दीर्घकालिक धरोहर छोड़कर गए है।

वे राजा महान सेनापति और विश्वविजयी भी थे और अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने अपने साम्राज्य को चर्मोत्कर्ष पर पहुँचा दिया था। इन महान सम्राटों ने ऐतिहासिक आर्थिक समृद्धि और सांस्कृतिक उपलब्धि के कारण आज भी इन्हें बेहद सम्मान के साथ याद किया जाता है। भारत के महान राजाओं की सूची (Most powerful king of India) में कुछ सम्राट ऐसे भी थे, जिनके शासनकाल के दौरान दुनियाभर के राजा भारत पर हमला करने से पहले 100 बार सोचते थे।

भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजा

भारत के इतिहास में, कई महान और शक्तिशाली राजा हुए है जिन्होंने अपने समय में अद्वितीय सफलता हासिल की और भारत की सीमाओं का भारतीय उपमहाद्वीप से आगे जाकर विस्तार किया। इस लेख में, हम आपको भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजाओं के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे, जिन्होंने भारतीय इतिहास को गौरवशाली अध्यायों से भर दिया।

Samrat Ashoka (सम्राट अशोक)

Samrat Ashoka (सम्राट अशोक)

सम्राट अशोक भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजाओं की सूची में प्रथम स्थान पर है, ये मौर्य राजवंश के तीसरे सम्राट थे। सम्राट अशोक महान विश्व के सबसे महान एवं शक्तिशाली राजाओं की सूची में हमेशा से शीर्ष स्थान पर रहे है। वे महान चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र, जिन्होंने मौर्य वंश की स्थापना की थी तथा सम्राट बिंदुसार मौर्य के पुत्र थे। भारत के महान सम्राटों में से एक, अशोक ने मौर्य वंश का विस्तार किया और एक साम्राज्य के शासक के रूप में शासन किया, जिसका क्षेत्रफल आज के पश्चिमी अफगानिस्तान से पूर्वदेशी बांग्लादेश, म्यामार तक फैला हुआ था।

सम्राट अशोक के साम्राज्य के अंतर्गत लगभग आज के 7 देश आते थे, जिसमे भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार, नेपाल,भूटान,और बांग्लादेश शामिल है। 52 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर शासन करने वाले सम्राट अशोक ने अपने जीवनकाल में एक भी युद्ध नही हारे। सिकन्दर के बाद सम्राट अशोक दूसरे और भारत के इकलौते शासक है जिनके नाम से पहले ‘महान’ शब्द का उपयोग किया जाता है।

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चन्द्रगुप्त मौर्य (Chandragupta Maurya)

मौर्य साम्राज्य भारत का पहला अखिल भारतीय साम्राज्य था और इसकी स्थापना सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ईसा पूर्व में कई थी। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता राजा चन्द्रवर्धन मौर्य पिपलिवन के एक छोटे से राज्य में शासन करते थे, जिसका नन्दो द्वारा विध्वंश कर दिया गया था। माना जाता है बाद में इनका पालन पोषण चरवाहों के द्वारा हुआ। युवावस्था में चाणक्य के साथ मिलकर चंद्रगुप्त मौर्य ने ‘नंद वंश’ को पराजित करने के बाद, ‘मौर्य वंश’ की स्थापना की, जो भारतीय इतिहास के आजतक का सबसे शक्तिशाली वंश था और प्राचीन वंशो में से प्रमुख वंश था।

जैन स्रोतों के अनुसार, चंद्रगुप्त मौर्य ने बाद में सब कुछ, अपनी शक्ति, धन, और पद को त्याग दिया और एक जैन मुनि बन गए। प्राचीन जैन ग्रंथों के अनुसार, चंद्रगुप्त मौर्य ने सब कुछ त्यागने के बाद अपने जीवन में जैन धर्म अपना लिया और जैन मुनियों के साथ कर्नाटक में उपवास के दौरान अपना देह त्याग दिया। इस कारण से उनका जैन धर्म मे एक महत्वपूर्ण स्थान है। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजाओं (Most powerful king of India) की सूची में दूसरे स्थान पर है।

Akbar (अकबर)

अकबर उन्हें जलाल उद्दीन मोहम्मद के नाम से भी जाना जाता है, इनका पूरा नाम अबुल-फतह जलाल-उद-दीन मुहम्मद अकबर था। अकबर का जन्म 15 अक्टूबर 1542 उमरकोट पाकिस्तान में हुआ था और इनका देहांत 27 अक्टूबर 1605 फतेहपुर सिकरी में हुआ था। अकबर,बाबर और हुमायूं के बाद मुग़ल वंश के तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण शासक थे। अकबर ने 1556 से 1605 तक शासन करते हुए मुगल वंश के तीसरे शासक के रूप में काम किया।

वह अपने पिता हुमायूँ के बाद सिंहासन पर बैठे और बैरम खान के मार्गदर्शन में, उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के भीतर मुगल क्षेत्रों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण का काम किया। एक सम्राट के रूप में अकबर अपने समावेशी और उदार दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने सांस्कृतिक आत्मसातीकरण की वकालत की, जिससे पूरे भारत में उनके प्रभाव और अधिकार का विस्तार हुआ।

अकबर ने अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए युद्ध के बजाय क्षेत्रियो राजाओं के साथ सम्बन्ध मजबूत करके किये। अपने विस्तृत शासन के अलावा, अकबर ने एक केंद्रीकृत प्रशासनिक प्रणाली लागू की जिसने अपने शासनकाल के तहत विशाल मुगल राज्य को एकीकृत किया। अकबर भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजा (Most powerful king of India) की सूची में तीसरे स्थान पर है।

शिवाजी महाराज (Shivaji Maharaj)

मराठा साम्राज्य के संस्थापक और प्रमुख शासक शिवाजी भोसले भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजाओं की सूची (Most powerful king of India) में चौथे स्थान पर है। इनका जन्म शाहजी भोंसले और जीजाबाई के घर 17 फरवरी 1630 को हुआ था। भोसले मराठा वंश से आने वाले शिवाजी महाराज ने एक स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की स्थापना की और रायगढ़ को इसकी राजधानी के रूप में बनाया था। शिवाजी महाराज ने मुगल साम्राज्य और बीजापुर की आदिलशाही सल्तनत के खिलाफ संघर्ष किया और उनके इस नेतृत्व के लिए उन्हें ‘छत्रपति’ की उपाधि दी गयी।

शिवाजी की विरासत एक दुर्जेय योद्धा और एकजुट करने वाले नायक के रूप में है, जिन्होंने मुगल सेनाओं के खिलाफ भारत के अधिकांश हिस्सों को एकजुट किया। शिवाजी महाराज ने अपने से बड़े और अधिक शक्तिशाली विरोधियों का सामना किया और उन्हें पराजित किया। उन्हीने युद्ध जीतने के लिए विभिन्न सैन्य रणनीति, विशेष रूप से गुरिल्ला युद्ध का नेतृत्व का इस्तेमाल किया। अप्रैल 1680 में, 52 वर्ष की आयु में, बुखार और पेचिश से पीड़ित होकर शिवाजी की मृत्यु हो गई। उनकी जीवित पत्नियों में से, सबसे बड़ी और निःसंतान पत्नी पुतलबाई ने उनकी चिता पर खुद को जलाकर सती कर लिया था।

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कनिष्क

कनिष्क, कुषाण राजवंश के सबसे उल्लेखनीय सम्राटों में से एक है, जिन्होंने 127 से 150 ईस्वी तक शासन किया था। सम्राट कनिष्क को राजनीति, सैन्य मामलों और आध्यात्मिकता में उनके गहन योगदान के लिए मनाया जाता है। कनिष्क का प्रभुत्व तारिम बेसिन में टर्फन से लेकर गंगा के मैदानी इलाके में स्थित प्राचीन पाटलिपुत्र, तक फैला हुआ था। जबकि कनिष्क की प्राथमिक राजधानी गांधार में पुरुषपुर थी, उन्होंने कपिसा को अपने क्षेत्र का एक और महत्वपूर्ण केंद्र भी नामित किया था।

कनिष्क की विरासत बौद्ध धर्म के उनके प्रबल समर्थन के साथ जुड़ी हुई है, जो उन्हें भारत के सबसे महान बौद्ध सम्राटों में से एक के रूप में स्थापित करती है। बौद्ध धर्म के प्रति उनके संरक्षण और समर्पण ने सिल्क रोड को बढ़ावा देने और गांधार क्षेत्र से काराकोरम रेंज और चीन तक फैले महायान बौद्ध धर्म के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जबकि कनिष्क मूल रूप से यूझी या रूझी जाति से थे, उन्होंने बाद में अपने जीवन के दौरान बौद्ध धर्म अपनाया। सम्राट कनिष्क भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजाओं की सूची (Most powerful king of India) में पांचवे स्थान पर है, और सम्राट अशोक के बाद बौद्ध धर्म मे दूसरे सबसे महत्वपूर्ण शासक है।

पृथ्वीराज चौहान

पृथ्वीराज चौहान, जिन्हें आमतौर पर राय पिथौरा या पृथ्वीराज तृतीय के नाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म 1178 में हुआ था और वह 1192 ई. तक जीवित रहे। पृथ्वीराज के पिता का नाम सोमेश्वर चौहान था और वे प्रतिष्ठित चौहान (चाहमान) वंश के थे। इनका शासन आधुनिक उत्तर-पश्चिमी भारत को समेत, लंबे समय से स्थापित चाहमान क्षेत्र, सपादलक्ष तक फैला हुआ था।
उन्होंने आधुनिक राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा के कुछ हिस्सों और उत्तर और मध्य प्रदेश के हिस्सों सहित विशाल क्षेत्रों पर शासन किया।

पृथ्वीराज चौहान को पूर्व-इस्लामिक काल के दौरान एक महान सम्राट और भारतीय शासक के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने इस्लामिक ग़ुरिद वंश के शासक, घोर के मुहम्मद गौरी के शुरुआती आक्रमणों का बहादुरी से विरोध किया। हालाँकि, 1192 ई. में, पृथ्वीराज को तराइन की दूसरी लड़ाई में घुरिड्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा, जो भारत में एक महत्वपूर्ण इस्लामी जीत का प्रतीक था।

महाराजा रणजीत सिंह

सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 1780 ईसवी में हुआ था। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में उत्तर पश्चिम भारत पर शासन किया था। शुरुआती दिनों में ही चेचक की बीमारी के कारण उनकी बायीं आंख की रोशनी चली गई थी। 10 साल की छोटी उम्र में, उन्होंने अपने पिता के साथ अपना पहला युद्ध शुरू किया और अपने पूरे जीवन में कई संघर्ष किये। महाराजा रणजीत सिंह का संघर्ष मुख्य रूप से अफगानों को भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर निकालने के लिए था।

उन्हें 21 साल की उम्र में ‘पंजाब के महाराजा’ की उपाधि मिली। रणजीत सिंह के कुशल नेतृत्व में, उन्होंने झेलम से लेकर सतलज तक पूरे मध्य पंजाब को शामिल करने के लिए कई युद्ध लड़े। महाराजा रणजीत सिंह 1830 के दशक के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे उनकी मृत्यु 27 जून, 1839 को खराब लीवर एयर स्ट्रोक के कारण सोने के दौरान हुई थी।

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सम्राट समुंद्रगुप्त

सम्राट समुंद्रगुप्त गुप्त वंश के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण शासक थे, वह न केवल एक दृढ़ विजेता और एक दुर्जेय योद्धा थे बल्कि उन्होंने कला और संस्कृतियों, विशेषकर कविता और संगीत के विभिन्न रूपों को अपने शासनकाल में बढ़ावा दिया। समुद्रगुप्त को एक उदार शासक के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने भारत के दक्षिणी और उत्तरी क्षेत्रों के अनुरूप विशिष्ट नीतियां लागू कीं, जिस कारण से उन्हें गुप्त साम्राज्य के सबसे महान सम्राट के रूप में जाना जाता है।

कई पश्चिमी विद्वानों द्वारा उन्हें ‘भारतीय नेपोलियन’ के रूप में मान्यता मिली। समुद्रगुप्त ने अपने प्रभुत्व का विस्तार करते हुए कई युद्ध लड़े और जीते। परिणामस्वरूप, गुप्त राजवंश ने इतिहास में सबसे शानदार राजवंशों में अपना स्थान अर्जित किया। 335 ईस्वी में गुप्त साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त प्रथम और लिच्छवी राजकुमारी कुमारदेवी के घर जन्मे समुद्रगुप्त ने पूरे बंगाल की खाड़ी में एक मजबूत साम्राज्य की स्थापना की।

महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 को महाराणा उदय सिंह के यहां एक सिसोदिया राजपूत परिवार में हुआ। उन्होंने आधुनिक राजस्थान के एक क्षेत्र मेवाड़ पर शासन किया। महाराणा प्रताप को मुख्य रूप से अकबर के सफल अतिक्रमण को विफल करने के उनके अटूट प्रयासों के कारण याद किया जाता है। महाराणा प्रताप को एक दुर्जेय योद्धा और राजस्थान के श्रद्धेय नायक के रूप में भी जाना जाता है। 1568 में, मुगलों ने चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी की और मेवाड़ के उपजाऊ पूर्वी हिस्सों पर नियंत्रण हासिल कर लिया।

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उस समय मुगल सम्राट अकबर ने मेवाड़ के रास्ते गुजरात तक एक मार्ग बनाने की मांग की थी। 1572 में अकबर ने यह प्रस्ताव देने के लिए दूत भेजे कि वे महाराणा प्रताप अकबर के जागीरदार के रूप में काम करें, जैसा कि राजस्थान के कई अन्य राजपूत राजाओं ने किया था। हालाँकि, महाराणा प्रताप ने दृढ़ता से अकबर के अधीन होने से इनकार कर दिया। जिससे दोनों शासकों के बीच हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून, 1576 को लड़ा गया था।

चंद्रगुप्त प्रथम

चंद्रगुप्त प्रथम, का जन्म 320 ई. में हुआ था, वे घटोत्कच गुप्त के पुत्र और श्री गुप्त के पोते थे। जबकि उनके पूर्ववर्तियों ने महाराजा की उपाधि धारण की थी, चंद्रगुप्त प्रथम ने अपने शासन के दौरान उल्लेखनीय महानता और सर्वोच्च प्रभाव के कारण महाराजाधिराज का प्रतिष्ठित उपाधि अर्जित की, जो “सभी राजाओं के राजा” का प्रतीक था। लिच्छवी राजकुमारी कुमारदेवी से से उन्होंने विवाह किया जिससे उनकी शक्ति में और इजाफा हुआ।

उनके प्रभुत्व में अवध, तिरहुत, आधुनिक बिहार, इलाहाबाद और मगध जैसे क्षेत्र शामिल थे। कुमारदेवी ने सिक्के पर चित्रित होने वाली भारत की अग्रणी रानी बनने का गौरव हासिल किया। 335 ई. में चन्द्रगुप्त प्रथम की मृत्यु हो गई और उसका उत्तराधिकारी उसका पुत्र समुद्रगुप्त हुआ। समुद्रगुप्त के नेतृत्व में, गुप्त राजवंश का विकास और विस्तार जारी रहा।

FAQs

भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजा कौन थे ?

भारत के 10 सबसे शक्तिशाली राजाओं में सम्राट अशोक, चन्द्रगुप्त मौर्य, अकबर, शिवाजी महाराज,कनिष्क,पृथ्वीराज चौहान, महाराजा रणजीत सिंह, सम्राट समुंद्रगुप्त और महाराणा प्रताप शामिल है।

भारत का सबसे ताकतवर राजा कौन हैं?

भारत का सबसे ताकतवर राजा सम्राट अशोक है।

शिवाजी महाराज क्यों प्रसिद्ध थे ?

शिवाजी महाराज अपनी बहादुरी,रणनीति और प्रशासनिक कौशल के साथ साथ गुरिल्ला युद्ध के लिए प्रसिद्ध थे।

सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता का नाम क्या था ?

सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता का नाम महाराजा चन्द्रवर्धन मौर्य था।

महाराणा प्रताप की कितनी पत्नियां थी ?

महाराणा प्रताप की 14 पत्नियां, 17 बेटे और 5 बेटियां थी।

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